TMC Rebel MPs Merge NCP: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का आज सबसे काला और विनाशकारी दिन साबित हुआ है। पिछले कई दिनों से पार्टी के भीतर सुलग रही आंतरिक बगावत की चिंगारी ने आज 14 जून 2026 को दिल्ली में एक ऐसा महा-विस्फोट किया है।
जिसने भारतीय संसद के भीतर विपक्ष के पूरे समीकरणों को मटियामेट कर दिया है। टीएमसी के 20 दिग्गज लोकसभा सांसदों ने आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बगावत का झंडा पूरी तरह बुलंद कर दिया है।
राजनीतिक गलियारों को हिला देने वाली इस TMC Rebel MPs Merge NCP की खबर के मुताबिक, इन 20 सांसदों ने खुद को दलबदल कानून से बचाने के लिए एक बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है।
इन सभी बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक क्षेत्रीय पार्टी ‘नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCP) में अपने गुट का पूरी तरह से विलय (TMC Rebel MPs Merge NCP) कर दिया है। दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात कर इन सांसदों ने संसद में अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है।
इसके साथ ही इस नए गुट ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बिना शर्त समर्थन देने का एलान कर दिया है। आइए जानते हैं बंद कमरे में हुई इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग की इनसाइड स्टोरी, इस टूट के पीछे का कानूनी गणित और ममता बनर्जी के कुनबे में लगी इस आग के क्या हैं सियासी मायने।
Anti Defection Law Lok Sabha: समझिए 20 सांसदों की बगावत का कानूनी खेल
राजनीतिक विशेषज्ञों और संसद के नियमों के अनुसार, भारत में किसी भी पार्टी के सांसद अगर बगावत करते हैं, तो उन पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) लागू होता है और उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है। लेकिन इस मामले में बागी गुट ने बेहद शातिर और कानूनी रूप से अचूक रणनीति अपनाई है:
- दो-तिहाई का जादुई आंकड़ा: साल 2024 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी ने कुल 29 सीटें जीती थीं। सितंबर 2024 में बशीरहाट के सांसद हाजी शेख नूरुल इस्लाम के निधन के बाद सदन में टीएमसी की प्रभावी संख्या 28 रह गई थी।
- दलबदल कानून से बचाव: संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti Defection Law Lok Sabha) के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3rd) सांसद एक साथ अलग होते हैं और किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं की जा सकती। 28 सांसदों में से दो-तिहाई का आंकड़ा 19 बैठता है, जबकि बागी गुट के पास पूरे 20 सांसद मौजूद हैं।
- Tripura National Citizens Party का चयन क्यों?: बागी नेताओं ने संसद में एक नया इंडिपेंडेंट ग्रुप बनाने के बजाय त्रिपुरा की इस रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी (NCPI) को चुना, ताकि तकनीकी और कानूनी रूप से विलय को 100% वैध दिखाया जा सके और अदालत में मामला टिक न पाए।
Kakoli Ghosh & Sudip Bandyopadhyay: दिल्ली में हुई स्पीकर से मुलाकात
रविवार देर शाम दिल्ली में हुए इस हाई-स्टेक्स ड्रामे के केंद्र में टीएमसी की वरिष्ठ नेता और मुख्य सचेतक (Chief Whip) रहीं डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और दिग्गज सांसद सुदीप बंदोपाध्याय रहे।
संसद भवन के सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों का यह गुट पहले केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर इकट्ठा हुआ, जहाँ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। वहां से रणनीति तय करने के बाद ये सभी सीधे TMC Rebel MPs Merge NCP के लिए स्पीकर ओम बिरला के घर पहुंचे।
बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार का आधिकारिक बयान
“हम ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) से निर्वाचित 20 सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात कर एक पत्र सौंपा है, जिसमें संसद में हमारे लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है। ये 20 सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से अधिक हैं। हम आधिकारिक रूप से नेशनल सिटीजंस पार्टी में विलय कर रहे हैं। अब से हम देश के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA Supporter Party Parliament के रूप में काम करेंगे।”
सुदीप बंदोपाध्याय ने मीडिया के तीखे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि ‘असली टीएमसी’ कौन है, इसका फैसला आने वाले दिनों में अदालत और चुनाव आयोग करेगा। उन्होंने दावा किया कि वे बहुत जल्द टीएमसी के आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘दो फूल’ (Jora Ghas Phul) पर भी अपना दावा ठोकेंगे क्योंकि लोकतंत्र में बहुमत ही सबसे ऊपर होता है।
दीदी के पास बचे सिर्फ 8 वफादार, ममता बनर्जी की पार्टी में ऐतिहासिक विभाजन
इस अप्रत्याशित महा-विभाजन (Great Split) के बाद लोकसभा के भीतर Mamata Banerjee Party Split 2026 की जमीनी हकीकत पूरी तरह बदल चुकी है। 28 सांसदों वाले इस बड़े दल के दो हिस्सों का पूरा ब्योरा नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है:
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विभाजन की वर्तमान स्थिति
| गुट का नाम (Faction) | कुल सांसदों की संख्या (Strength) | मुख्य चेहरा और नेतृत्व (Leaders) | राजनीतिक स्टैंड और भविष्य (Stance) |
| बागी गुट (Rebel Faction) | 20 सांसद (2/3rd बहुमत) | डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय, शर्मिला सरकार | नेशनल सिटीजंस पार्टी (Tripura) में विलय, NDA को खुला समर्थन। |
| ममता गुट (Loyalist Faction) | 08 सांसद (अल्पमत) | अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, कीर्ति आज़ाद | ममता बनर्जी के प्रति वफादार, ‘INDIA’ विपक्षी गठबंधन का हिस्सा। |
ममता बनर्जी के खेमे में अब केवल 8 सांसद बचे हैं जिनमें महुआ मोइत्रा, शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आज़ाद और सागरिका घोष जैसे चेहरे शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस कदम को पूरी तरह से असंवैधानिक बताते हुए स्पीकर को एक कड़ा पत्र भेजा है और मांग की है कि इन बागी सांसदों को तुरंत अयोग्य (Disqualify) घोषित किया जाए।
Mamata Banerjee Party Split 2026: राजनीतिक रणनीतिकारों और वरिष्ठ संपादकों का क्या है कहना?
पश्चिम बंगाल और देश की राजनीति पर बारीक नजर रखने वाले क्रेडिबल राजनीतिक विश्लेषकों के अनुभव के आधार पर इस महा-टूट के 3 बड़े दूरगामी प्रभाव देखने को मिलने वाले हैं:
- लोकसभा में विपक्ष का पतन: संसद के भीतर तृणमूल कांग्रेस अब तक भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बाद तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी ताकत थी। इस बगावत के बाद विपक्ष का मनोबल संसद के आगामी मानसून सत्र में पूरी तरह से टूट जाएगा।
- पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर: हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी हार और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष चरम पर था। विधायकों के बाद अब सांसदों की इस टूट से स्पष्ट है कि राज्य में ममता बनर्जी का राजनीतिक नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो रहा है।
- कपिल सिब्बल और कानूनी लड़ाई: राज्यसभा सांसद और देश के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल ने इस विलय को ‘थिएटर ऑफ द एब्सर्ड’ (मजाक) करार दिया है। उनका कहना है कि विधायी दल (Legislative Party) का विलय तब तक नहीं हो सकता जब तक मूल राजनीतिक दल (Organizational Party) ऐसा न चाहे। ऐसे में यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच तक जाना तय है।
TMC Rebel MPs Merge NCP: कोलकाता के राजनीतिक गलियारों से इनसाइड स्टोरी
“बागी सांसदों का आरोप है कि बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद भी पार्टी के भीतर आत्ममंथन करने के बजाय तानाशाही रवैया अपनाया गया। सीनियर लीडर्स को पीछे धकेल कर जूनियर नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा था, जिससे सांसदों के भीतर पिछले 15 महीनों से भारी गुस्सा उबल रहा था जो आज दिल्ली में इस रूप में बाहर आया।”
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा देकर वामपंथियों के 34 साल के साम्राज्य को उखाड़ फेंकने वाली ममता बनर्जी की अपनी बनाई पार्टी आज ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है। दिल्ली और कोलकाता के बीच छिड़ी इस सबसे बड़ी सियासी जंग की पल-पल की लाइव कवरेज और Political News Hindi की सबसे सटीक व प्रामाणिक अपडेट्स के लिए हमारे पेज को लगातार रीफ्रेश और फॉलो करते रहें!
