NDA Two Thirds Majority 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही आंतरिक बगावत की आग अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुकी है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने देश की संसद के भीतर सत्तापक्ष और विपक्ष के समीकरणों को पूरी तरह से उलट-पलट कर रख दिया है।
टीएमसी में मची इस ऐतिहासिक टूट के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को संसद में एक बहुत बड़ी ताकत मिलने जा रही है। ताजा राजनीतिक आंकड़ों और रिपोर्ट के मुताबिक, इस बगावत के बाद NDA Two Thirds Majority 2026 (दो-तिहाई बहुमत) के उस जादुई आंकड़े की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
जिसकी मदद से संविधान संशोधन जैसे देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जा सकता है। राज्यसभा में जहां एनडीए इस ऐतिहासिक मार्क के बेहद करीब पहुंच गई है।
वहीं लोकसभा में टीएमसी के बागी सांसदों के समर्थन के बावजूद एनडीए का आंकड़ा अभी भी दो-तिहाई के आंकड़े से थोड़ा दूर नजर आ रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर दीदी के कुनबे में हुई इस बगावत से दिल्ली की सत्ता का गणित कैसे बदल गया है और कौन से बड़े कानून अब पास होने वाले हैं इस Political News Hindi में।
Trinamool Congress Rebellion: राज्यसभा की 3 सीटों ने बदला खेल
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायकों के ‘हस्ताक्षर जालसाजी’ (Signature Forgery) विवाद के बाद शुरू हुई Trinamool Congress Rebellion ने टीएमसी के संसदीय दल को दो फाड़ कर दिया है। इसका सबसे पहला और सीधा असर संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा पर देखने को मिला है।
- टीएमसी सांसदों का इस्तीफा: टीएमसी के तीन बड़े राज्यसभा सांसदों— सुखेन्दु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है।
- उपचुनाव में एनडीए को फायदा: इन तीन सीटों के खाली होने के बाद होने वाले Rajya Sabha Seats Bypolls (उपचुनाव) में बंगाल के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों (जहां 58 टीएमसी विधायकों ने अलग गुट बना लिया है) के चलते ये तीनों सीटें सीधे एनडीए के खाते में जाने की पूरी उम्मीद है।
- 154 पर पहुंचेगा आंकड़ा: इन 3 सीटों के जीतने के बाद राज्यसभा में एनडीए की कुल सदस्य संख्या बढ़कर 154 हो जाएगी। उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत साबित करने के लिए 163 सीटों की जरूरत होती है, यानी बीजेपी और सहयोगी दल इस जादुई आंकड़े से महज 9 सीट दूर रह जाएंगे।
Delimitation Bill Parliament: क्या दोबारा आएगा परिसीमन कानून?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बढ़ती ताकत के बाद मोदी सरकार आगामी मानसून सत्र में उस कानून को दोबारा ला सकती है जो अप्रैल के महीने में संसद में गिर गया था। सरकार का लक्ष्य Delimitation Bill Parliament (चुनावी निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से निर्धारण) को दोबारा पटल पर रखना है।
दरअसल, अप्रैल 2026 में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, जिसे परिसीमन विधेयक भी कहा जाता है, संसद में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया था। इसी वजह से महिलाओं को संसद में आरक्षण देने वाला बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण विधेयक भी अधर में लटक गया था, क्योंकि वह परिसीमन से ही जुड़ा हुआ था। अब राज्यसभा में मजबूत होती स्थिति को देखकर सरकार इस बिल को पास कराने के लिए नए सिरे से रणनीति बना रही है।
NDA Two Thirds Majority 2026: लोकसभा का गणित बगावत के बाद भी बहुमत का पेंच
लोकसभा में टीएमसी के 29 सांसदों में से करीब 20 सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ जाकर एक अलग गुट बनाने और एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है। लेकिन इस Lok Sabha Constitution Amendment (लोकसभा संविधान संशोधन) के स्तर पर एनडीए की राह उतनी आसान नहीं है जितनी राज्यसभा में दिख रही है:
संसद के दोनों सदनों में एनडीए की वर्तमान और संभावित स्थिति
| सदन का नाम (House) | कुल सीटें (Total) | दो-तिहाई के लिए जरूरी | एनडीए की संभावित स्थिति (TMC बगावत के बाद) | वर्तमान कमी / पेंच |
| राज्यसभा (Upper House) | 245 | 163 | 154 (3 उपचुनाव जीतने के बाद) | सिर्फ 9 सीटें कम (मनोनीत और छोटे दलों से पूरी होने की उम्मीद) |
| लोकसभा (Lower House) | 543 | 362 | 213 (बागी टीएमसी सांसदों के साथ) | अब भी दो-तिहाई से काफी दूर (कड़ा पेंच बरकरार) |
लोकसभा में टीएमसी के 20 सांसदों के समर्थन के बाद भी एनडीए का आंकड़ा 213 के आसपास पहुंच रहा है, जो कि दो-तिहाई बहुमत (362 सीटें) से अभी भी काफी कम है। यही कारण है कि लोकसभा में किसी भी बड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए सरकार को कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों के बड़े समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी।
वरिष्ठ राजनीतिक रणनीतिकारों का क्या है कहना?
देश के शीर्ष राजनीतिक विश्लेषकों और वरिष्ठ संपादकों के अनुभव के आधार पर अगर NDA Two Thirds Majority 2026 की इस इनसाइड स्टोरी का विश्लेषण किया जाए, तो इसके 3 बड़े सियासी मायने निकलते हैं:
- ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका: पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी से सीआईडी (CID) की पूछताछ और पार्टी के भीतर विधायकों व सांसदों की खुली बगावत ने ममता बनर्जी के राष्ट्रीय राजनीतिक कद को भारी नुकसान पहुंचाया है।
- दबाव में आएगा विपक्ष: राज्यसभा में एनडीए का दो-तिहाई के करीब पहुंचना कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव होगा, क्योंकि उच्च सदन में अब विपक्ष सरकार के बिलों को आसानी से नहीं रोक पाएगा।
- मानसून सत्र होगा हंगामेदार: जुलाई के तीसरे हफ्ते से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी रार देखने को मिल सकती है, क्योंकि परिसीमन और अन्य नीतिगत बदलावों को लेकर सरकार का आक्रामक रुख देखने को मिलेगा।
कोलकाता और दिल्ली के गलियारों से इनसाइड स्टोरी:
“टीएमसी के बागी नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर तानाशाही रवैये और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के मुद्दों के कारण यह विस्फोट हुआ है। वहीं कांग्रेस इस पूरी बगावत पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और संसद के भीतर विपक्षी एकता को बचाए रखने के लिए अन्य क्षेत्रीय दलों से लगातार संपर्क में है।”
इस बड़े उलटफेर के बाद देश की संसद का मानसून सत्र बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक होने वाला है। क्या पीएम मोदी राज्यसभा के इस नए गणित के दम पर बड़े सुधारों को अमलीजामा पहना पाएंगे? इस बड़े राजनीतिक संकट और बदलती Political News Hindi की पल-पल की लाइव व प्रामाणिक अपडेट्स के लिए हमारे पेज को लगातार फॉलो करते रहें!
इस राजनीतिक संकट और संसद के भीतर बदल रहे NDA Two Thirds Majority 2026 की संख्याबल को और गहराई से समझने के लिए आप इस विशेष रिपोर्ट को देख सकते हैं:
TMC Crisis and NDA’s Two-Thirds Majority Strategy — यह वीडियो विस्तार से विश्लेषण करता है कि कैसे तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान Rajya Sabha Seats Bypolls का फायदा उठाकर एनडीए संसद के दोनों सदनों में अपने नंबर गेम को मजबूत करने की कोशिशों में जुटी है।
