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AAP MPs in BJP: राघव चड्ढा समेत AAP के 7 सांसदों ने थामा भाजपा का दामन, केजरीवाल को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका!

राघव चड्ढा भाजपा में शामिल (Raghav Chadha joins BJP), आप सांसद भाजपा में (AAP MPs in BJP), आम आदमी पार्टी बड़ी टूट (AAP Party Split)

AAP MPs in BJP: राघव चड्ढा समेत AAP के 7 सांसदों ने थामा भाजपा का दामन, राज्यसभा में केजरीवाल को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है।  आज यानी 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों का भाजपा में शामिल होना देश में खलबली बना दिया है। 

भारतीय राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना बड़े-बड़े दिग्गजों के लिए भी मुश्किल होता है। लेकिन 24 अप्रैल 2026 को जो खबर आई है। उसने न केवल दिल्ली और पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया।

बल्कि पूरे देश को चौंका दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे युवा और चर्चित चेहरे राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है।

यह केवल एक दलबदल नहीं है। AAP MPs in BJP से।अरविंद केजरीवाल के लिए एक ऐसा राजनीतिक झटका है जिसकी भरपाई शायद आने वाले दशकों में भी न हो पाए।

राघव चड्ढा भाजपा में शामिल (Raghav Chadha joins BJP), आप सांसद भाजपा में (AAP MPs in BJP), आम आदमी पार्टी बड़ी टूट (AAP Party Split)

आपको बता दूं कि राघव चड्ढा ने आप छोड़ी (Raghav Chadha quits AAP)। अब वो भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। उनके साथ 7 सांसद (7 AAP MPs join BJP), राज्यसभा में आप-भाजपा विलय (AAP BJP Rajya Sabha Merger) कर लिया है।

इसके राज्यसभा में केजरीवाल को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका! केजरीवाल के पैर के तले से जमीन खिसक गया। अरविंद केजरीवाल ने इसे पंजाबियों के साथ “धक्का” (धोखा) बताया है। 

राघव चड्ढा ने क्यों कहा- ‘गलत पार्टी में सही आदमी था’? भाजपा में शामिल होते ही खोला आम आदमी पार्टी का बड़ा राज!” आखिर क्यों 15 साल का साथ छोड़ राघव चड्ढा हुए भगवा? जानें उन 7 सांसदों के नाम जिन्होंने बदली पाला।”

AAP MPs in BJP से राजनीति ने करवट ली: कैसे हुआ यह महा-उलटफेर?

पिछले कुछ हफ्तों से गलियारों में चर्चा तो थी कि ‘आप’ के भीतर कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लेकिन राघव चड्ढा जैसे वफादार सिपाही का भाजपा में जाना किसी ने सोचा भी नहीं था। 

दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में जेपी नड्डा और अमित शाह की मौजूदगी में इन सांसदों ने सदस्यता ली। इस टूट ने आम आदमी पार्टी की नींव हिला दी है। राज्यसभा में ‘आप’ की ताकत अब न के बराबर रह गई है। जिससे संसद के उच्च सदन में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल गया है।

इन 7 महारथियों ने छोड़ा केजरीवाल का साथ AAP MPs in BJP 

AAP MPs in BJP

भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों की सूची लंबी और प्रभावशाली है:

  • राघव चड्ढा: पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा और रणनीतिकार।
  • स्वाति मालीवाल: महिला अधिकारों की आवाज़ और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष।
  • हरभजन सिंह: पूर्व क्रिकेटर और पंजाब का बड़ा चेहरा।
  • संदीप पाठक: पार्टी के चाणक्य और संगठन महामंत्री।
  • अशोक मित्तल: शिक्षा क्षेत्र के दिग्गज।
  • संजीव अरोड़ा: पंजाब के बड़े कारोबारी।
  • विक्रम साहनी: सामाजिक कार्यकर्ता और प्रभावशाली उद्यमी।

दलबदल कानून का पेंच: AAP BJP Rajya Sabha Merger पर इन सांसदों की सदस्यता बचेगी या जाएगी?

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे। संविधान के 10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के अनुसार, अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती।

यहाँ 10 में से 7 सांसद एक साथ गए हैं। जिसका मतलब है कि इन सभी की सांसदी बरकरार रहेगी और राज्यसभा में भाजपा का संख्या बल नाटकीय रूप से बढ़ जाएगा।

आखिर राघव चड्ढा ने क्यों बदला पाला?

सूत्रों की मानें तो राघव चड्ढा और पार्टी आलाकमान के बीच पिछले कुछ समय से वैचारिक मतभेद चल रहे थे। भाजपा जॉइन करने के बाद अपने पहले बयान में चड्ढा ने कहा, “मैं एक ऐसी जगह काम करना चाहता हूँ जहाँ विजन और विकास की राजनीति हो, न कि केवल विरोध की।”

हालांकि, जानकार इसे केजरीवाल की गिरफ्तारी और पंजाब में सरकार चलाने के तौर-तरीकों से उपजी नाराजगी मान रहे हैं।

राज्यसभा में बदला समीकरण: AAP MPs in BJP से भाजपा की बल्ले-बल्ले

इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में अब भाजपा के लिए बिल पास कराना बेहद आसान हो जाएगा। जहाँ पहले विपक्षी एकता भाजपा के लिए चुनौती खड़ी करती थी। 

वहीं अब ‘आप’ के इन 7 सांसदों के आने से उच्च सदन में एनडीए (NDA) की स्थिति और भी मजबूत हो गई है। यह सीधे तौर पर 2029 के आम चुनाव से पहले विपक्ष को मनोवैज्ञानिक रूप से तोड़ने की कोशिश मानी जा रही है।

अरविंद केजरीवाल के सामने अब क्या चुनौतियां हैं?

केजरीवाल के लिए यह ‘अस्तित्व का संकट’ है। उनके सबसे करीबी साथी रहे राघव और संदीप पाठक का जाना यह बताता है कि पार्टी के भीतर संवाद की भारी कमी है।

संगठन में दरार: संदीप पाठक संगठन देख रहे थे। उनके जाने से ‘आप’ का ढांचा बिखर सकता है।

जनता का विश्वास: लोग पूछ रहे हैं कि जो पार्टी ईमानदारी और निष्ठा की बात करती थी। उसके सांसद क्यों छोड़ रहे हैं?

विपक्ष की एकता पर सवाल: इंडिया गठबंधन के लिए भी यह एक बुरा संकेत है।

भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ या ‘आप’ की अंदरूनी कलह?

विपक्ष इसे भाजपा की साजिश बता रहा है। वहीं भाजपा का कहना है कि लोग प्रधानमंत्री मोदी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर आ रहे हैं। सच्चाई जो भी हो, लेकिन राजनीति के बिसात पर केजरीवाल इस वक्त सबसे कमजोर स्थिति में नजर आ रहे हैं।

भाजपा के लिए राज्यसभा का नया समीकरण 2026 तैयार हो गया है। अरविंद केजरीवाल के एकमेव नेतृत्व और पार्टी की अंदरूनी कलह से ऐसा हुआ है। अपने करीबी नेताओं के आवाज दबाने पर आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट हो गई है।

आपको पता है कि स्वाति मालीवाल भाजपा में शामिल हो गई है। कुछ साल पहले उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर बड़ा आरोप लगाया है। स्वाति मालीवाल के अनुसार उन्हें मुख्यमंत्री के घर में पीटा गया था। जिस पर केजरीवाल के निजी सलाहकार पर संदेह उठा था। 

निष्कर्ष

भारतीय राजनीति के इस बड़े अध्याय ने यह साफ कर दिया है कि सत्ता के खेल में कोई भी स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। ‘आप’ से भाजपा तक का यह सफर देश की राजनीति की दिशा बदल सकता है। 

अब देखना यह होगा कि अरविंद केजरीवाल इस मलबे से अपनी पार्टी को दोबारा कैसे खड़ा करते हैं। AAP MPs in BJP शामिल हो गई है। अब क्या पंजाब केरीवाल के हाथों से चला जाएगा? ये बड़ा सवाल जहन में उठता है।

Read also- New pole of Indian politics: क्या अब ‘हिंदू हितों’ को नजरअंदाज करना मुमकिन नहीं ?

Shivji Kumar
Shivji Kumarhttp://samvadshiv.com
I am a student and also a bit of a thinker. I am a freelance journalist. I am fond of writing, I have been writing for the last 5 years.
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